Tuesday, December 25, 2012

25th Day :: The Golden Compass 2

मैंने अपने experiences से सीखा है कि अगर हम सही हैं तो  हमें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए विरोध को हमेशा तैयार रहना चाहिए।
किसी गलत चीज़ का विरोध पहली बार मृदु भाषा में समझाने की शैली में ,  दूसरी बार गलती दोहराने पर कटु भाषा में चेतावनी की शैली में और तीसरी बार गलती दोहराने पर बेहद कटु शैली में इस तरह करना चाहिए कि फिर चाहे मार-पीट की नौबत आ जाए ,  दंगा हो जाए , धरती हिल जाए ,  आसमान फट जाए या मौत आ जाए ,  हमें अपना विरोध ज़ारी रखना चाहिए जब तक कि  हमारी समस्या का सम्पूर्ण समाधान न हो जाए।
कुछ मामलों में हम देखते हैं कि politicians जनविरोध को देखते हुए  त्वरित किन्तु आँशिक समाधान करके मामला शांत करने का प्रयास करते हैं। हमें यहाँ भी सजगता दिखानी चाहिए।
ध्यान रखें कि बदलाव तभी आ सकता है जब हम विरोध की शुरुआत करें तो किसी भी कीमत पर समस्या के समाधान से पहले न रुकें।
......................................! जय हिन्द !.......................................

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