22nd Day ::The Unemployment

जनसंख्या के बढ़ने के साथ-साथ हमारे देश में बेरोज़गारी की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। इसका  एक उपाय जनसंख्या को सीमित करना तो है ही, साथ में कुछ अन्य उपाय भी हैं।
असल में बेरोज़गारी की समस्या रोज़गार के अवसरों की कमी के कारण नहीं , बल्कि रोज़गार के अवसरों को न ढूँढ पाने के कारण ज्यादा है।
अक्सर हम भीड़ में भेड़ बन जाते हैं। हम अगर देखते हैं कि  हमारे पड़ोस का लड़का Doctor या engineer बनकर पैसा कमा रहा है तो हम भी doctor या engineer बनने  का प्रयास करने लगते हैं। भले ही हममें उस लड़के जैसी क्षमता न हो। नतीजा ये होता है कि हम उस  क्षेत्र में समय और पैसा दोनों बर्बाद करते हैं और कुछ बन भी नहीं पाते।
जबकि अगर हम अपनी क्षमता के अनुसार क्षेत्र का चुनाव करें तो सफल होने के चांसेस बढ़ जाते हैं।इसलिए हमें क्षेत्र का चुनाव अपनी रूचि , क्षमता और उस क्षेत्र में vacancy की संख्या देखकर करनी चाहिए न कि दूसरे छात्र की सफलता को देखकर !
क्षेत्र के चुनाव के लिये अगर हम हर लेवल पर career काउंसलर की मदद लें तो ज्यादा अच्छा  होगा।
अगर आपकी क्षमता कम है तो प्रतिस्पर्धियों से भरे पड़े पैसे वाले क्षेत्र की अपेक्षा कम पैसा वाला नया क्षेत्र आपकी सफलता की ज्यादा गारंटी दे सकता है।
कुछ इसी तरह की समस्या बिजनेस में भी है। मेरे ख्याल से एक बिजनेसमैन को जगह विशेष की जरूरत के अनुसार और उस क्षेत्र में अपनी कबिलियत  के अनुसार shop का चुनाव करना चाहिए।

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