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Showing posts from June, 2011

12th Day :: Bazaarvaad : D most fatal thing today

इधर कुछ दिनों से स्वदेसी आन्दोलन जोर पकड़ता जा रहा है. भ्रष्टाचार , काले धन के साथ-साथ यह मुद्दा भी ज़रूरी है, मैं  मानता हूँ, लेकिन जिस तरह से हमारे देश की सारी समस्याओं के लिए सिर्फ विदेशियों को दोष देकर हम अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ ले रहे हैं, वह गलत है. हमें यह ध्यान रखना होगा कि  विदेशी मुद्दे की हवा में हमारे देश के अपने लोग जो भ्रष्टाचारी हैं , वे न बचने पायें और ये मुद्दा हिन्दू-मुस्लिम मुद्दे की तरह हमारे देश के भ्रष्ट राजनेताओं के लिए एक नया 'political weapon' न बन जाये.

 सौभाग्य से पिछले कुछ दिनों में कुछ special persons & special conditions की वजह से हिन्दू-मुस्लिम मुद्दा और स्टेट, भाषा आदि मुद्दों को जनता ने सामाजिक सौहार्द्र से समाप्त कर दिया है या कम कर दिया है, इसके लिए मैं लोगों को बधाई देता हूँ. लेकिन जिन लोगो का फायदा लोगों के आपसी झगड़े से ही होता है, वो ऐसे मुद्दों के सहारे सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ने और अपने राजनैतिक हित साधने की कोशिश कर सकते हैं. इसलिए हमें यह मुद्दा पूरी समझदारी के साथ उठाना चाहिए और अपना aim निर्धारित करना चाहिए कि हमें सिर्फ व…

11th day :: Benefits of certainty of death

Very-very thanx 2 god 4 making death 'certain',so that it is present in our mind as an universal truth which teaches us d way 2 live in many ways...


1. we know that our life is limited,so that we get forced 2 do d works  also in a fast way & enjoy d life more n more b4 it gets lapsed. As a result we get forced 2 leave our laziness ...


2. we know that whatever we do 2 save us 4m death, it will come certainly one day, then y fear 4m death. it makes us freeminded even in a very bad situation which allows us 2 think freely n make good decision in that bad situation when generally one's mind gets closed n couldn't be able 2 think anything.


  Some other benefits r also may exist but this time my mind can't get more ...  buy....
  Be cooool !