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Showing posts from 2017

69th day :: reality of dreams

ज़िन्दगी में हम सभी consciousness में रहते हुए एक लक्ष्य तय करते हैं और उसे पूरा करने का प्रयास करते है। यही 'लक्ष्य तक पहुँचने की इच्छा' को हम 'dream' (or  vision ) कहते हैं। जाने -अनजाने में यह 'इच्छा' (dream )  हमारे unconscious mind में भी स्टोर हो जाती है। इसलिए जब हम unconsciousness की दशा (or sleeping position) में होते है तो हमारा unconscious mind उस अधूरी इच्छा को पूरी करने के लिए एक पूरा animation या वीडियो बनाकर हमें हमारी इच्छा को पूरी होते हुए दिखाता है।
dreams के बारे में एक और बात सच है कि ये तभी आते हैं जब दिमाग में स्थित hormones में disbalance होता है या हमारा unconscious mind जागता रहता है।
एक स्वस्थ व्यक्ति जिसका सोने -जागने का समय निश्चित हो ,कोई तनाव न हो ,खाने -पीने की मात्रा निश्चित और उचित हो या hormonal disbalance न हो,  तो उसे सपने आने की probability भी बहुत कम होती है। इसका voice -versa भी उतना ही सही है।
e.g.   हम रात को खा-पी कर समय पर सो गए और हमारे उठने का समय 7 am  है लेकिन रात में 3 am को हमें पेशाब लग जाए तो क्या होगा?चूँकि हम…

68th day :: Modi or Tuglak

मीडिया में आजकल देश के प्रधानमंत्री मोदी जी छाए हुए हैं। पर क्या मोदी जी इतने चमत्कारिक हैं , जितना कि प्रचारित किया जा रहा है। लेकिन हक़ीक़त की जमीन पर मोदी क्या हैं ? मेरे हिसाब से मोदी वर्तमान के तुगलक हैं  जो बहुमत की सत्ता के मद में चूर होकर , अपने विरोधियों को तो छोड़िये अपने सहयोगियों और अन्य एक्सपर्ट्स की राय लिए बिना फैसले पर फैसले लिए जा रहे हैं। ऐसे तानाशाही शासन को जनता कब तक बर्दाश्त करेगी। मीडिया हर गलत फैसले की तुष्टिकरण के लिए कुछ खरीदे हुए लोगों के मुख से मोदी जी के पक्ष में कुछ बाते कहलवा दे रही है और देश की जनता टीवी के सामने बैठकर 'All is Well' के सपनों में जी रही है। अब मोदी जी के तुगलकी फरमानों पर एक नज़र डालते हैं :- मोदी जी ने सत्ता में आते ही 100 दिनों के अंदर काला धन देश में वापस लाने का सपना दिखाया था। बहुत शोर - शराबे के बाद आज का सच ये है कि कालेधन का मुद्दा दबाने के एवज में मीडिया और पॉलिटिक्स से जुड़े कई लोग 'slumdog millionair' की ही तरह slumdog से millionair बन गए और जनता आस लगाए बैठी रही। जनता यही सोचती रही कि मोदी जी के घर देर है अंधेर नहीं। ले…

67th Day :: why i couldn't laugh at the comedy shows and films in india

आजकल tv channels पर comedy shows की बाढ़ सी आ गयी है और साथ ही आ गयी है इनपर भद्दे और अश्लील comments की बाढ़।
 एक अच्छा कॉमेडियन खुद पर व्यंग्य करके कॉमेडी पैदा करता है(जैसे कि सर्कस में एक जोकर करता है) न कि दूसरों की खिल्ली उड़ाकर और अश्लील कमेंट्स की मदद लेकर।
जैसा कि मैंने पहले भी बाज़ारवाद के post में लिखा है कि दिक्कत किसी वस्तु को बेचे जाने से नहीं होती बल्कि बाजार के saturated होने के बाद जबरदस्ती जरुरत पैदा करने की कोशिश से होती है।  और कॉमेडियंस को sexual topics और guests की खिल्ली उड़ाने वाले टॉपिक्स ऐसे ही आसान मुद्दे लगते हैं। जिनसे रोज के show के लिए मसाला मिल जाता है otherwise अच्छे मुद्दों पर कॉमेडी करने के लिए ज्यादा मेहनत और ज्यादा time की जरूरत होती है जो ये कॉमेडियन करना नहीं चाहते ।
कभी -कभी तो ये कॉमेडी guests और public के लिए भी असह्य हो जाती है।  इसलिए कॉमेडी करते समय guests और दर्शकों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
 ..........jai hind.........
...........be cool...........

66th Day :: Misuse of Confusion in Politics

Confusion has its own pros & cons. I had tell you before in my previous post that confusions are beneficial specifically in research because it helps to break set limits even when you don't have much will power to break it .  but its bad result is that it conjume much time and still results we get maybe wrong..because by the state of confusion we could  get the power to open an unknown gate but we didn't know that gate opens in the way will be of heaven or hell .so if we are in the state of confusion, we need somebody who knows the right way and can save us from opening the wrong door of hell & at whom we can fully trust .
  but by our bad fate more people in the world are just opposite . such people who instead  of saving us from confusion, tries to get gain by throwing us in the situation of confusion.
these are those opportunist 50/50 type people who behave you good as well as bad behavior so that you never can decide to oppose them . and by this gain they reigne on u…

65th day ::: जीत-हार का क्रम :: कितनी सच्चाई कितना भ्रम

कुछ दुर्भाग्यशाली लोगों (जिनके guardians लापरवाह होते हैं ) को छोड़कर बाकी सभी लोगों को जन्म से ही जीतना सिखाया जाता है। ऐसा करना पुरी तरह गलत भी नहीं है लेकिन हम जीतना सिखाते हुए ये सिखाना भूल जाते हैं कि जीत किस कीमत पर पाना चाहिए । हमें ये ध्यान देना चाहिए कि कहीं हम जीत से मिलाने वाले पैसे या ख़ुशी या सम्मान आदि से ज्यादा जीत हासिल करने के लिए गँवा तो नहीं रहे ?
     आजकल दुनिया में ऐसी ही आपाधापी मची है। सबको जीत चाहिए चाहे उसके लिए कुछ भी कीमत चुकानी पड़े। ऐसे लोग ही अधिकतर कुछ चालाक लोगो का काम या तो प्यादा बनकर जीतने के लिए करते है या फिर किंग बनकर न हारने के लिए ही करते हैं।
कीमत चुकाने के उदहारण के तौर पर देखें तो एक छोटी सी नौकरी पाने के लिए लोग 5-10 लाख तक रिश्वत देने को तैयार रहते हैं। चाहे उतनी रकम वसूलने में जिंदगी ही क्यों न गुजर जाए।
दूसरे उदाहरण के तौर पर हम देख सकते है कि जीत और पैसे के लिए लोग कितना नीचे गिर जाते हैं।  यहाँ तक कि लोग murder , molestation  और rape से भी बाज नहीं आते।
हमें किसी को जीतना सिखाने से पहले यह सिखाना चाहिए कि उस जीत को पाने के लिए किस हद तक …

63rd day :: A salute to real boldness

हमारी फिल्म इंडस्ट्री और समाज में भी लड़कियों के कपडे उतारने को ही बोल्डनेस का पर्याय माना जाता है।  लेकिन कुछ दिनों पहले मैंने  रियल बोल्डनेस  को देखा।  मैंने देखा कि कैसे कुछ साधारण लड़कियों और हीरोइनों तक ने अपने साथ हुए molestetion और sexual abuse की घटना को खुलेआम सबके सामने रखा। ऐसा करने के लिए बहुत ही courage की जरूरत थी , जो इन लड़कियों में थी।  साथ ही इसी courage की कमी की वजह से कई दोषीं अपराधी सजा से बच जाते हैं।

62th day :: Computer hi Computer hai, Solution kuch pata nahi

आज की दुनिया में कंप्यूटर का बहुत महत्त्व है।  कंप्यूटर ने हमारे बहुत से काम आसान कर दिए है।  वास्तव में कंप्यूटर ने भगवान् का रूप ले लिया है।  आपको जानकार आश्चर्य होगा क़ि अब ये सिर्फ कहने की ही बात नहीं रह गयी है यह सच है , आज परम कंप्यूटर ने परमात्मा की जगह ले ली है।  हमसे जो कहा जाता है कि परमात्मा सब देख , सुन और जान रहा है , वो असल में कोई व्यक्ति होता है जो परम कंप्यूटरों के माध्यम से हमारी जानकारियां चुरा रहा होता है। दुनिया भर में कुल 50 -100  सुपर कंप्यूटर, परम कंप्यूटर या क़्वांटम कंप्यूटर होंगे जो इन्ही तरह के कामो में लगे है। अगर इनका उपयोग समाज की भलाई के लिए और बुरे लोगों के खिलाफ  होता तो शायद इतनी दिक्कत की बात नहीं थी लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा है , बल्कि इसका ठीक उल्टा यानी कुछ पावरफुल लोगों द्वारा आम लोगों के खिलाफ और scientists की कीमती जानकारिया चुराने में  हो रहा है।
आइये मैं आपको detail में बताता हूँ -

1.   Listener Computer :-  इस तरह के कंप्यूटर के द्वारा आपकी सभी बातें चाहे वो कितनी ही निजी क्यों न हो सुनी जा सकती हैं , यहां तक कि आपके बैडरूम की बातें…

61th Day :: A good decision to make our country clean

Make non_veg, liquor, cigarette & lather industry only in one district...

हमारा देश विविधताओ का देश है। हमारे देश में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के लोग पर्याप्त मात्रा में है।  समस्या ये है कि माँसाहारी व्यक्ति को तो शाकाहारी व्यक्ति से कोई दिक्कत नहीं होती क्योंकि वो माँस के साथ -साथ साग -सब्जी भी खा सकता है लेकिन शाकाहारी व्यक्ति को माँस , शराब आदि से दिक्कत होती है।  साथ ही असामाजिक तत्व भी शराबी और माँसाहारी लोग ही होते हैं।
इसलिए मेरा सुझाव है कि अगर मांस ,,शराब , गुटखा ,सिगरेट ,बीड़ी , चमड़ा आदि जैसे उद्योगों को देश भर से हटाकर सिर्फ एक शहर तक सीमित कर दिया जाय और इनकी बिक्री के लिए हर शहर और गाँव से ५०० मीटर दूरी पर एक छोटा सा बाजार निर्धारित कर दिया जाए , जहां डिब्बा बंद मांस , शराब , सिगरेट आदि उपलब्ध हो। बाकि हर जगह इन चीजों की बिक्री पर रोक लगा दी जाये।
इससे एक फायदा तो ये होगा कि शाकाहारी लोगों को अपने सामने बकरा आदि कटते हुए और सड़क आदि पर फेंके गए बेकार मांस के टुकड़ों को नहीं देखना पड़ेगा और दूसरा फायदा ये होगा कि गाँव के सभी असामाजिक तत्त्व अधिकतर गाँव से बाहर रहे…

60th Day. :: Love: from my point of view

Love is simply the god's grace on earth.
True Love is to find someone who feels to you like everything, someone without which you can't find the happiness in your favourite music, without which you feel tatally alone even in the crowd, no taste feels in your favourite dishes. The two of them are like the two parts of zigsaw puzzle which makes a perfect picture after combined I.e. together they mean everything but without joining they mean nothing & as one of my friend has said that if one can love another not only when he sees others brighter side but after seeing darker side of that, then It's true Love..!

59th Day :: How to make our society clean from bad people

Our society is like a computer system & bad people are like the file infected with a virus. So we should use a solid antivirus system to make our computer(society) clean.Now think how an antivirus works:- it first repaires the files which are less corrupted and repairable & deletes the highly corrupted and unrepairable files.
Now a question raises that how we can set the limit when a corrupted file(bad people) is repairable and when it needs deleting? this limit all depends on our capacity or +ve energy.for this take a look to the science theory of energy:-
Positive and negative energy :-. Energy is like two pots filled with water. If we connect both the pots then energy will flow from higher to lower energy pot either it's +ve or -ve.  So We should be in the company of people with higher +ve energy & away from people with-ve energy.


we can use our anti virus by using 3 keys-
  i. e.  Ctrl, Alt then Delete key
now learn the condition to use these keys:-

Ctrl key      :-  if …

64th day :: What we mean by Spirituality

Spirituality is a well planned psychology for goodness of honest people except some which are implanted forcefully for looting people by fake priests.
E.g.
  -  If you help others, the God will help you:  I have been described it in previous post that if you help others then many others will also get inspired & help people in need. Suddenly it will be a routine. Thus now you will get the most possibility of getting helped in danger.
Many other examples also exists but i can't get it right now ....

58th Day ::. Want to do Suicide; please do but do that slightly differently

I have explained before that suicide is also a type of decease and it can be cured as well as can be created also.  So if you are suffering from  suicidal thoughts then please contact a psychologist or psychiatrist.
But what to do untill you contact the doctor? you know that bear doesn't kill or eat the dead person, death is also like this . when you get surrounded by suicidal thoughts, just close your eyes & suppose yourself as dead! Now think what is the use of your dead body? you will feel that dead body is of no use for you ,so decide that you will donate it to the world i. e. "after today i will never want anything for me because i'm dead & so i will do everything for others".  Try to sleep now. Next day as you arises first remember what you have decided yesterday then think "today before sleeping I will help atleast ten people... After helping others you will feel a great relief in evening because now you have no tension to do something for yourself…

57th Day :: Psychology behind some ideologies

(1) बड़ों के सामने और भगवान  के सामने सर झुकाना चाहिए।
सच्चाई :- ऐसे वाक्य सीधे -साधे लोगों को कमजोर बनाकर उनसे गुलामी कराने के लिए कहे जाते हैं। बचपन में माँ - बाप के पैर छूने से शुरू हुआ यह सिलसिला आगे भगवान् ,फिर पंडित जी ,फिर गुरु , फिर डॉक्टर ,मंतरी ,विधायक ,पुलिस , जमींदार से होते हुए सड़क छाप दबंग तक पहुँच जाता है और सीधा -साधा आदमी जन्म से लेकर मौत तक सबके सामने नतमस्तक रहता है। और उसके झुके होने का फायदा उठाते हुए ये चालाक और बुरे लोग ज़िन्दगी भर उस भले आदमी की पीछे से मारते रहते हैं और वो सज्जनता के बोझ तले  दबा कभी विरोध भी नहीं कर पाता। 
 interesting बात ये है कि माता -पिता बच्चे का भला चाहते हुए भी ज़िन्दगी भर बच्चा ही बनाये रखना चाहते हैं।  वे उसे  कभी अपने पैरों पर खड़ा होने और दूसरों की गलत बातों का विरोध करना नहीं सिखाते। जहाँ तक भगवान् की बात है तो भगवान् को अच्छे लोगों को अपने क़दमों में झुकाने में अगर  ख़ुशी मिलती तो वो कभी आदमी को चार पैरो की जगह सर उठाकर दो पैरों पर चलने की काबिलियत ही नहीं देता।  हाँ बुरे लोगो को झुकाना चाह सकता है , वो भी सिर्फ इसलिए की वो अपने घमंड को…

56th day :: No decease in the world is incurable

Some people may be shocked by reading this. But it's really true. There are many deceases in the world but every decease certainly  has it's permanent solution not available to people because of some reason either it's a small problem like cold, cough, headache etc or a big problem like anxiety, depression, dementia, madness, polio, hepatitis, cancer, aids, migraines, heart attack, high blood pressure, low blood pressure, confusion, focus problem, sexual problems  etc. 
Believe me it's true! Only accidental incidents need cure &operations in the hospital, otherwise all other deceases can be cured by a small amount of medicine at home even for a small time & also with a very low cost.
The reason why these deceases doesn't cured in hospitals are mainly 3, which are as follows -
1.    Doctor couldn't analyze what is the  problem or it's reason.
2.     Doctor doesn't want to cure so fast because he wants to make more money.
3.     Doctor doesn't wa…