Thursday, April 18, 2013

38th Day :: Some Positive changes i shall like to make in Voting system

 1More weightage to more educated person :- 

लोकतंत्र का मूल सिद्धान्त है- संख्याबल।  इसका मतलब कि वह व्यक्ति सरकार चलाने योग्य है जिसको देश के ज्यादातर लोग देश चलाने लायक समझते हैं। मगर मेरा मानना है कि इस तरह के सिस्टम में एक ही कमी है(जो कि कई समस्याओं की मुख्य वजह है) कि इसमें घोड़ों गधों और भेड़ों को एक समान मान लिया गया है। जबकि हम जानते हैं कि गधे न तो घोड़ों जितना समझदार होते हैं न ही तेज। इस तरह सभी गधों को बेवकूफ बनाकर उनसे मनचाहा काम करवाने के लिए शायद एक लोमड़ी की भी जरूरत न पड़े।
इसी तरह भेडों के झुण्ड में सबसे आगे चलने वाले भेड़ को गिनिये या पूरे झुण्ड को एक ही गिनिये, कोई फर्क नहीं है। क्योंकि हम सभी जानते हैं कि सबसे आगे चलने वाला भेड़ जिस रास्ते का चुनाव करेगा बाकी भेड़ भी बिना सोचे-समझे उसी का अनुसरण करेंगे और सिर्फ एक भेड़ को कुछ लालच देकर या डंडा दिखाकर मनचाही दिशा में घुमाना कोई बड़ी बात नहीं।
इसलिए सोचिये अगर हमारे लोकतंत्र में भेड़ अधिसंख्य हों तो सिर्फ एक भेड़ को येन-केन-प्रकारेण नियन्त्रित करके बहुमत पाया जा सकता है।फिर बाकी समझदारों की चिन्ता कोई करे भी तो क्यों ?  हमारे देश में काफी कुछ ऐसा ही है। इसलिए सत्ता पर बैठे नेता मनचाहे ढंग से देश को लूटते हैं और चुनाव आते ही देश के गधों को बेवकूफ बनाकर या भेड़ो को मनचाही दिशा में मोड़कर दुबारा चुनाव जीत जाते हैं। इसके बाद देश का पढ़ा-लिखा,जागरूक और बौद्धिक वर्ग बस पछताता रह जाता है और निराश,हताश हो जाता है।
 मैं नहीं जानता कि इस समस्या का कोई सम्पूर्ण समाधान है या नहीं लेकिन एक समाधान मेरे पास जरूर है। हम सभी किसी बड़ी समस्या का हल जब नहीं निकाल पाते तो समाधान के लिए अपने से ज्यादा पढ़े-लिखे और अनुभवी व्यक्ति के पास राय लेने जाते हैं। क्योंकि हम जानते हैं कि वो हमसे ज्यादा समझदार है इसलिए हमसे बेहतर निर्णय ले सकता है। मेरा कहना है कि हम यही नियम Voting के समय क्यों नहीं अपनाते? हम लोगों की पढाई के level और अनुभव के आधार पर Voting में weightage क्यों नहीं देते ?

My suggesion :-

  • 0-9th                                                              =                    1 vote
  • 10th pass-12th studying                                =                    2 vote
  • 12th pass-undergraduate                               =                    3 vote
  • graduate                                                        =                    4 vote
  • post graduate                                                =                     5 vote
  • Ph.D or equivalent                                       =                     6 vote
  • VIP,VVIP or equivalent                               =                     7 vote
  • with the age 60+                                           =                     +1 or +2 vote extra
*   इस सुझाव को लागू करने की स्थिति में हमें नक़ल और फर्जी डिग्रियों पर रोक लगाने के लिए विशेष प्रयास करना होगा।
इस सुझाव को लागू करने पर कई लाभ होंगे :-
  • लोकतंत्र मजबूत होगा।
  • चुनाव से जाति-धर्म, दंगे-फसाद और ऐसे ही अन्य बेमतलब के मुद्दे खुद-ब-खुद समाप्त हो जायेंगे, कई बार अच्छे नेताओं को भी चुनाव जीतने के लिए जिनका सहारा लेना पड़ता है।
  • शिक्षित और बौद्धिक वर्ग ज्यादा सम्मानित महसूस करेगा, लोकतंत्र की वर्तमान स्थिति पर उसकी निराशा दूर होगी और देश के विकास में ये वर्ग ज्यादा उत्साह से काम करेगा।
  • वर्तमान -ve politics, +ve politics में बदलने को कुछ हद तक तो मजबूर हो ही जाएगी ।

2=   Prime-minister's election same in the way of America's Presidential election:-

हम सभी चुनाव के बाद के जोड़-तोड़ से अच्छी तरह परिचित हैं। हर चुनाव के बाद मुख्य पार्टियों के बहुमत से दूर रहने पर यह खेल शुरू हो जाता है, जिसमें गठबंधन की सरकार बनने की स्थिति में समर्थन देने या न देने के नाम पर जो सौदेबाजी शुरू होती है वो सरकार का कार्यकाल पूरा होने तक जारी रहती है। जिसके चलते कभी किसी अंगूठा-छाप को शिक्षा-मंत्री बना दिया जाता है तो कभी किसी बाहुबली को खनन-विभाग या ऐसा ही कोई अन्य मलाईदार विभाग देकर खुली लूट की छूट दे दी जाती है। एक अच्छा प्रधानमंत्री चाहकर भी देश के विकास से जुड़े कार्यों को करने की जगह ऐसे भ्रष्ट लोगों को किसी तरह खुश करके अपनी कुर्सी बचाने में ही लगा रहता है और बाकी समय इनके किये घोटालों को ढँकने में जुटा रहता है। अगर लोगों को खुश करने में वो जरा सा भी नाकाम हो जाता है तो उसकी सरकार गिर जाती है और देश की जनता का ढेर सारा पैसा और समय बेकार चला जाता है।
मेरे ख्याल से एक बार चुन लिए जाने के बाद प्रधानमंत्री को 5 साल के कार्यकाल के लिए पूरी तरह दबाव-मुक्त और विभिन्न मंत्रालयों के लिए मंत्रियों की नियुक्ति और दूसरे imp. फैसले स्वतंत्र रूप से लेने में सक्षम बनाने का प्रयास करना चाहिए। वैसे पिछले कुछ समय में कुछ छोटे दलों ने सत्तारूढ़ पार्टी को बिना शर्त बाहर से समर्थन देने का स्वागतयोग्य कदम उठाया है। छोटे दलों द्वारा लिया गया यह पहला कदम मुझे दिखाई देता है जो उन्हें राष्ट्र के प्रति संवेदनशील प्रदर्शित करता है। इससे पहले मुझे कभी किसी क्षेत्रीय पार्टी का राष्ट्रीय मुद्दों के बारे में लिया गया फैसला नहीं दिखा था जिसे उनका राष्ट्र के प्रति योगदान माना जा सके। वैसे इसके पीछे कोई छुपी वजह भी हो सकती है जैसे कि सपा ने कहा भी है कि उसने कांग्रेस को समर्थन सीबीआई के डर से दिया है। जो भी सच हो मैं नहीं जानता लेकिन 5 साल की स्थिर सरकार और प्रधानमंत्री को स्वतंत्र और साहसिक निर्णय लेने लायक बनाने के लिए इस व्यवस्था (बाहर से बिना शर्त समर्थन देने की )  को आपसी समझबूझ के द्वारा हमेशा कायम रखना होगा।
 दूसरा और permanent solution है कि भारत में प्रधानमन्त्री का चुनाव अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव की तरह सीधे जनता द्वारा कराये जाय।

3=   No Voting :- 

                              उम्मीदवारों का चुनाव करते समय एक option 'None of These' भी रखना उचित होगा। भले ही यह एक बेकार की चीज लगे इससे किसी क्षेत्र-विशेष की condition का पता लगाया जा सकता है। हमारे देश में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ सिर्फ अपराधी और बाहुबली ही चुनाव लड़ते हैं,दूसरा कोई आदमी उनके खिलाफ नहीं लड़ता । ऐसी जगह अगर जनता किसी को वोट देने लायक न समझे तो उसे इसका अधिकार एक option के रूप में जरूर मिलना चाहिए।कुछ जगहों पर अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए विरोध में अपने ही साथी को उतार दिया जाता है। ऐसी सभी जगहों पर  कुल 'None of these' option पर पड़े वोटों के आधार पर उस क्षेत्र में उम्मीदवारों की बदतर स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है। मेरा तो यह भी मानना है कि अगर 'None of these' option पर पड़े वोटों की संख्या किसी भी उम्मीदवार को मिले वोटों से ज्यादा हो तो सभी उम्मीदवारों को उस क्षेत्र से चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए और चुनाव रद्द करके नये उम्मीदवारों के साथ फिर से चुनाव कराना चाहिए।

..........................!!!     Jai Hind    !!!................................

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