Monday, April 15, 2013

35th Day:: Some examples of use of psychology & psychiatry by a mafia

1 . साइकोलॉजी के कुछ उदाहरण :-
  मैंने पहले कहीं पढ़ा था कि मेंढक को अगर किसी पानी भरे बर्तन में डालकर बर्तन को गर्म किया जाय तो पानी के तेज गर्म होने पर भी वह बर्तन से बाहर नहीं भागता और मारा जाता है।
 कुछ ऐसा ही लगता है जब मैं ये देखता हूँ कि दो-तीन दशक पहले तक फिल्मों में हीरोइन के भीगी साडी में होने पर भी बवाल मचाने वाले लोग आज भारतीय मॉडल्स के प्लेबॉय में न्यूड फोटो छपवाने के बावजूद चुप रहते हैं।
दूसरा उदाहरण है कि बचपन में गुटखा भी न खाने वाला लड़का पहले मीठे पान से शुरुआत करता है और उसके बाद जर्दा पान फिर गुटखा,सिगरेट,बियर,शराब को ट्राई करते हुए एक दिन चरस,हेरोइन जैसे अधिक नशीले पदार्थों का आदी बन जाता है और अपने इन खर्चों को पूरा करने के लिए अपराध का अँधेरा रास्ता पकड़ लेता है। इस तरह एक माफिया को अपने गैंग के लिए नए gangastar मिल जाते हैं। एक माफिया अपने गैंग में नए लोगों को भर्ती करने के उद्देश्य से मेलजोल बढाने के लिए और लोगों में अपना डर फैलाने के लिए  भी साइकोलॉजिकल tricks का सहारा लेता है।
इस मामले में किसी महत्वपूर्ण आदमी के अचानक किसी लम्बी बीमारी से ग्रस्त होने और फिर लम्बी बीमारी के बाद मृत्यु एक उदाहरण है। आजकल anxiety , hypertention , high or low blood pressure etc सभी बीमारिओं को पैदा करने वाली दवाएँ बन चुकी हैं। latest fashion  heart-attack पैदा करने वाली दवाओं और suicidal behaviour create करने वाली दवाओं और और ऐसी conditions create करने वाली psychological tricks का है। psychological tricks के उदाहरण के तौर पर किसी लड़की को भेजकर प्यार का नाटक करवाना और लड़के को भी प्यार होने पर बेरुखी के साथ उसका दिल तुडवाना या किसी पढ़ाई में interest रखने वाले लड़के का exam ख़राब करवा देना आदि हैं जिससे वो लड़का suicide  करने पर मजबूर हो जाये। 
2 . psychiatry के कुछ उदाहरण :
  • आखिर डॉक्टरों के इश्तिहारों से पटे हुए क्षेत्र में ही सबसे अधिक बीमार क्यों मिलते हैं?
  • आखिर बाहरी खाने से लोगों की तबीयत क्यों खराब हो जाती है ?
  • आखिर ऐसे दुकानदारों के पास 'अच्छे' डॉक्टरों  की पूरी लिस्ट क्यों होती है ?
  • सच तो यह है कि दुसरे उद्योगों की तरह दवा और नशे के लिए नए ग्राहक बनाने के लिए अनुचित तरीके अपनाकर इनकी जरूरत पैदा करने की कोशिश की जा रही है। अभी तक तो नशे की लत छुड़ाने के लिए ही दवाएं बनी थीं लेकिन अब ये लत लगाने के लिए भी दवाएं बन चुकी हैं। यहाँ तक कि इनकी बिक्री के लिए नए तरीके अपनाए जा रहे हैं।पहले जहाँ इनकी लत लगाने के लिए सिगरेट और शराब जैसी कम नशीली चीजों में चरस,हेरोइन जैसे अधिक नशीले पदार्थ चुपके से मिलाये जाते थे वहीँ अब भारी नशे की लत लगाने वाली चीजों और दवाओं को चुपके से सीधे लोगों के खाने-पीने की आम चीजों में मिलाकर उन्हें नशे का आदी बनाने की कोशिश की जा रही है।

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