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75th day:: pooja, functions & our streets

भारत में पूरे साल भर विभिन्न कार्यक्रमों (शादी-विवाह आदि) का आयोजन होता रहता है।   अभी कुछ ही समय में नवरात्र हैं जिसमें दुर्गापूजा का आयोजन होना है। जिसके लिए जगह-जगह पान्डाल लगाने की शुरुआत हो चुकी है। साथ ही इन पान्डालों को लगाने के लिए सडकों पर गढ्ढे खोदने शुरू किये जा चुके हैं। आश्चर्य की बात है कि आज हम खुद सडकों पर गढ्ढा खोद रहे हैं और कल ही सरकार व नेताओं को इसके लिये गाली देंगे।    इस समस्या के समाधान के रूप में मेरा मानना है कि इन सभी कार्यक्रमों और पूजा का आयोजन marriage hall में या शहर के बाहर सडक से दूर किसी जमीन पर मनाया जाना चाहिए।

68th day :: Modi or Tuglak

मीडिया में आजकल देश के प्रधानमंत्री मोदी जी छाए हुए हैं। पर क्या मोदी जी इतने चमत्कारिक हैं , जितना कि प्रचारित किया जा रहा है। लेकिन हक़ीक़त की जमीन पर मोदी क्या हैं ? मेरे हिसाब से मोदी वर्तमान के तुगलक हैं  जो बहुमत की सत्ता के मद में चूर होकर , अपने विरोधियों को तो छोड़िये अपने सहयोगियों और अन्य एक्सपर्ट्स की राय लिए बिना फैसले पर फैसले लिए जा रहे हैं। ऐसे तानाशाही शासन को जनता कब तक बर्दाश्त करेगी। मीडिया हर गलत फैसले की तुष्टिकरण के लिए कुछ खरीदे हुए लोगों के मुख से मोदी जी के पक्ष में कुछ बाते कहलवा दे रही है और देश की जनता टीवी के सामने बैठकर 'All is Well' के सपनों में जी रही है। अब मोदी जी के तुगलकी फरमानों पर एक नज़र डालते हैं :- मोदी जी ने सत्ता में आते ही 100 दिनों के अंदर काला धन देश में वापस लाने का सपना दिखाया था। बहुत शोर - शराबे के बाद आज का सच ये है कि कालेधन का मुद्दा दबाने के एवज में मीडिया और पॉलिटिक्स से जुड़े कई लोग 'slumdog millionair' की ही तरह slumdog से millionair बन गए और जनता आस लगाए बैठी रही। जनता यही सोचती रही कि मोदी जी के घर देर है ...

65th day ::: जीत-हार का क्रम :: कितनी सच्चाई कितना भ्रम

कुछ दुर्भाग्यशाली लोगों (जिनके guardians लापरवाह होते हैं ) को छोड़कर बाकी सभी लोगों को जन्म से ही जीतना सिखाया जाता है। ऐसा करना पुरी तरह गलत भी नहीं है लेकिन हम जीतना सिखाते हुए ये सिखाना भूल जाते हैं कि जीत किस कीमत पर पाना चाहिए । हमें ये ध्यान देना चाहिए कि कहीं हम जीत से मिलाने वाले पैसे या ख़ुशी या सम्मान आदि से ज्यादा जीत हासिल करने के लिए गँवा तो नहीं रहे ?      आजकल दुनिया में ऐसी ही आपाधापी मची है। सबको जीत चाहिए चाहे उसके लिए कुछ भी कीमत चुकानी पड़े। ऐसे लोग ही अधिकतर कुछ चालाक लोगो का काम या तो प्यादा बनकर जीतने के लिए करते है या फिर किंग बनकर न हारने के लिए ही करते हैं। कीमत चुकाने के उदहारण के तौर पर देखें तो एक छोटी सी नौकरी पाने के लिए लोग 5-10 लाख तक रिश्वत देने को तैयार रहते हैं। चाहे उतनी रकम वसूलने में जिंदगी ही क्यों न गुजर जाए। दूसरे उदाहरण के तौर पर हम देख सकते है कि जीत और पैसे के लिए लोग कितना नीचे गिर जाते हैं।  यहाँ तक कि लोग murder , molestation  और rape से भी बाज नहीं आते। हमें किसी को जीतना सिखाने से पहले यह सिखाना चाहिए कि ...

62th day :: Computer hi Computer hai, Solution kuch pata nahi

आज की दुनिया में कंप्यूटर का बहुत महत्त्व है।  कंप्यूटर ने हमारे बहुत से काम आसान कर दिए है।  वास्तव में कंप्यूटर ने भगवान् का रूप ले लिया है।  आपको जानकार आश्चर्य होगा क़ि अब ये सिर्फ कहने की ही बात नहीं रह गयी है यह सच है , आज परम कंप्यूटर ने परमात्मा की जगह ले ली है।  हमसे जो कहा जाता है कि परमात्मा सब देख , सुन और जान रहा है , वो असल में कोई व्यक्ति होता है जो परम कंप्यूटरों के माध्यम से हमारी जानकारियां चुरा रहा होता है। दुनिया भर में कुल 50 -100  सुपर कंप्यूटर, परम कंप्यूटर या क़्वांटम कंप्यूटर होंगे जो इन्ही तरह के कामो में लगे है। अगर इनका उपयोग समाज की भलाई के लिए और बुरे लोगों के खिलाफ  होता तो शायद इतनी दिक्कत की बात नहीं थी लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा है , बल्कि इसका ठीक उल्टा यानी कुछ पावरफुल लोगों द्वारा आम लोगों के खिलाफ और scientists की कीमती जानकारिया चुराने में  हो रहा है। आइये मैं आपको detail में बताता हूँ - 1.   Listener Computer :-  इस तरह के कंप्यूटर के द्वारा आपकी सभी बातें चाहे वो कितनी ही निजी क्यों न ह...

61th Day :: A good decision to make our country clean

Make non_veg, liquor, cigarette & lather industry only in one district... हमारा देश विविधताओ का देश है। हमारे देश में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के लोग पर्याप्त मात्रा में है।  समस्या ये है कि माँसाहारी व्यक्ति को तो शाकाहारी व्यक्ति से कोई दिक्कत नहीं होती क्योंकि वो माँस के साथ -साथ साग -सब्जी भी खा सकता है लेकिन शाकाहारी व्यक्ति को माँस , शराब आदि से दिक्कत होती है।  साथ ही असामाजिक तत्व भी शराबी और माँसाहारी लोग ही होते हैं। इसलिए मेरा सुझाव है कि अगर मांस ,,शराब , गुटखा ,सिगरेट ,बीड़ी , चमड़ा आदि जैसे उद्योगों को देश भर से हटाकर सिर्फ एक शहर तक सीमित कर दिया जाय और इनकी बिक्री के लिए हर शहर और गाँव से ५०० मीटर दूरी पर एक छोटा सा बाजार निर्धारित कर दिया जाए , जहां डिब्बा बंद मांस , शराब , सिगरेट आदि उपलब्ध हो। बाकि हर जगह इन चीजों की बिक्री पर रोक लगा दी जाये। इससे एक फायदा तो ये होगा कि शाकाहारी लोगों को अपने सामने बकरा आदि कटते हुए और सड़क आदि पर फेंके गए बेकार मांस के टुकड़ों को नहीं देखना पड़ेगा और दूसरा फायदा ये होगा कि गाँव के सभी असामाजिक तत्त्व अ...

59th Day :: How to make our society clean from bad people

Our society is like a computer system & bad people are like the file infected with a virus. So we should use a solid antivirus system to make our computer(society) clean.Now think how an antivirus works:- it first repaires the files which are less corrupted and repairable & deletes the highly corrupted and unrepairable files. Now a question raises that how we can set the limit when a corrupted file(bad people) is repairable and when it needs deleting? this limit all depends on our capacity or +ve energy.for this take a look to the science theory of energy:- Positive and negative energy :- . Energy is like two pots filled with water. If we connect both the pots then energy will flow from higher to lower energy pot either it's +ve or -ve.  So We should be in the company of people with higher +ve energy & away from people with-ve energy. we can use our anti virus by using 3 keys-   i. e.  Ctrl, Alt then Delete key now learn the condition to use...

48th day :: Corruption : it's just not because they take,it's because we give

हम सभी corruption से परेशान हैं।  शायद ही कोई दिन ऐसा जाता है जब हम इसके लिए system को न कोसते हों। लेकिन क्या कभी हम सोचते हैं कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है ? जवाब है कि इसके लिए कहीं न कहीं हम सभी जिम्मेदार हैं। हम सभी राशन (या गैस आदि ) के लाइन में लगे होते हैं तो हम सभी चाहते हैं कि पैसे देकर , पहचान दिखाकर या दबंगई करके राशन हमें पहले मिल जाए। इधर हमने लाइन तोड़कर राशन लिया और उधर corruption को पैदा कर दिया। लेकिन हमें दिक्कत तब होती है जब कोई और (जो हमारी नक़ल करके ही corruption सीखता है) लाइन तोड़कर हमसे पहले राशन ले लेता है।             एक और अच्छा उदाहरण देता हुँ ::- हममें से अधिकतर लोग अपने गन्तव्य तक जल्दी पहुंचने के लिए ट्रैफिक सिग्नल तोड़ देते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम लग जाता है। ज्यादा से ज्यादा हम ट्रैफिक पुलिस को रिश्वत देकर बच जाते हैं, लेकिन हमें दिक्कत तब होती है जब हमारी ही नक़ल करके कोई और ट्रैफिक सिग्नल तोड़ कर जाम लगा देता है और उसकी वजह से हमें घंटों देर हो जाती है ।     यही ट्रैफिक जाम हमारे system का corruption है। ...

42nd Day :: Power management & leadership

दुनिया में power के कई केन्द्र हैं। किसी के पास  पैसे की , किसी के पास बाहुबल की , कोई politics में महारत रखता है तो कोई जनमत जुटाने में , कोई ऐसा डॉक्टर है जो बड़ी से बड़ी बीमारियाँ ठीक कर सकता है तो कोई पलक झपकते ही किसी भी देश में महामारी फैला सकता है। कोई हथियार बनाने और बेचने में उस्ताद है तो कोई शांति-प्रक्रिया  के द्वारा बिना हथियार उठाये ही जंग जीतने में निपुण। किसी के पास ऐसी मीडिया की ताकत है जो सच को कहीं से भी खोदकर निकालने में सक्षम है तो कोई इतना बड़ा lawer (i will prefer to call as 'Lier' ) है जो बड़े से बड़े सच को भी झूठ  साबित कर देता है।  कुल मिलाकर दुनिया में अच्छी और बुरी कई तरह की ताकतें हैं। बुरी ताकतों के मालिक का उद्देश्य गलत होता है इसलिए वो सही ताकत को भी गलत तरीके से इस्तेमाल करके लोगों से लाभ लेने की कोशिश में लगे रहते हैं लेकिन उन्हें ये पता नहीं होता की हमारा personal फायदा सबसे ज्यादा तब होता है जब हम खुद से पहले दूसरों के फायदे की बात सोचते हैं। ऐसे लोग अक्सर कालिदास की तरह होते हैं जो अनजाने में वह...

38th Day :: Some Positive changes i shall like to make in Voting system

 1 =  More weightage to more educated person :-   लोकतंत्र का मूल सिद्धान्त है- संख्याबल।  इसका मतलब कि वह व्यक्ति सरकार चलाने योग्य है जिसको देश के ज्यादातर लोग देश चलाने लायक समझते हैं। मगर मेरा मानना है कि इस तरह के सिस्टम में एक ही कमी है(जो कि कई समस्याओं की मुख्य वजह है) कि इसमें घोड़ों गधों और भेड़ों को एक समान मान लिया गया है। जबकि हम जानते हैं कि गधे न तो घोड़ों जितना समझदार होते हैं न ही तेज। इस तरह सभी गधों को बेवकूफ बनाकर उनसे मनचाहा काम करवाने के लिए शायद एक लोमड़ी की भी जरूरत न पड़े। इसी तरह भेडों के झुण्ड में सबसे आगे चलने वाले भेड़ को गिनिये या पूरे झुण्ड को एक ही गिनिये, कोई फर्क नहीं है। क्योंकि हम सभी जानते हैं कि सबसे आगे चलने वाला भेड़ जिस रास्ते का चुनाव करेगा बाकी भेड़ भी बिना सोचे-समझे उसी का अनुसरण करेंगे और सिर्फ एक भेड़ को कुछ लालच देकर या डंडा दिखाकर मनचाही दिशा में घुमाना कोई बड़ी बात नहीं। इसलिए सोचिये अगर हमारे लोकतंत्र में भेड़ अधिसंख्य हों तो सिर्फ एक भेड़ को येन-केन-प्रकारेण नियन्त्रित करके बहुमत पाया जा सकता है।फिर बाकी समझदारों की चिन...

37th Day :: The Voting

लोकतंत्र हमारे समाज की एक बड़ी खासियत है और लोकतंत्र की सबसे imp. चीज है - Voting. वोटिंग एक ऐसी चीज है जो किसी भी देश की दशा और दिशा निर्धारित करती है। voting किसी भी देश के आम नागरिक को सबसे महत्वपूर्ण और सबसे जिम्मेदार बनाता है। इसलिए देश की बुरी दशा की जिम्मेदारी आम नागरिक को भी लेनी चाहिए। हम हमेशा देश की बुरी दशा के लिए सरकारों को दोषी ठहराते हैं लेकिन हम यह भूल जाते हैं की इन सरकारों को चुनते हम लोग ही हैं। इसलिए हमारी यह जिम्मेदारी बनती है कि हम पूर्व में शासन कर चुकी सरकारों द्वारा किये गए अच्छे और बुरे कामों का रिकॉर्ड रखें और वर्तमान सरकार के कामकाज पर नजर रखें। इसके बाद चुनाव में शामिल सभी पार्टियों और उम्मीदवारों के बीच तुलना करने के बाद उनके जनहित में या जनविरोधी नीतियों के आधार पर यह फैसला करें कि कौन सी पार्टी या उम्मीदवार देश के सम्पूर्ण विकास के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है न कि इस आधार पर कि कौन सी पार्टी या उम्मीदवार किसी वर्ग विशेष के लिए कुछ कर देगा या कोई मंदिर-मस्जिद बना देगा । साथ ही हमें सभी उम्मीदवारों के बारे में भी अच्छी तरह से जानकारी ले लेनी चाहिए। अंत में...

18th Day :: Our system

Anyone can't say our police & politicians as corrupt & lazy, especially after giving an eye at Dowd's brother attack matter where accused were caught in only few hours.even khufia agencies helped in finding the accused. while even after a minister's killing, our police & whole system remain unable to find the accused in many years.  So the difference is only that what is the priority of our police,politicians & system, nothing else.