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76th Day :: Bhoot Pret ka chakkar : Kitna Sach Kitna Ghanchakkar

भूत प्रेत के बारे में हम सभी ने सुना है। कुछ लोग मानते हैं तो कुछ नहीं मानते लेकिन आप सबने observe जरूर किया होगा कि गांव देहातों में भूत -प्रेत लोगों को अपने वश में कर लेते हैं और शहरों में लोग मानसिक बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं ।वास्तव में यह दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जहां एक तरफ general awareness के चलते शहरों में मानसिक बीमारियों का पहचान  करके इसका इलाज किया जाता है वही गांव में है उसे भूत में समझ कर उसका झाड़-फूंक किया जाता है। भूत- प्रेत का लेनदेन वास्तव में नशीली दवाओं का लेन-देन होता है जिसे victim दबाव डालने पर स्वीकार करता है( जहां  दबाव डालने के लिए ओझा तांत्रिक मिर्च वगैरह का धुआं या कोई अन्य डर आदि दिखाते हैं)। अक्सर लोग कहते हैं कि फलां आदमी ने उन्हें भूत दे दिया है तो इसका वास्तविक आशय होता है कि भला आदमी ने उसे नशीली दवा दे दिया है जिससे वह किसी मानसिक बीमारी के चपेट में आ गया है।  ओझा तांत्रिकों के पास इस बीमारी का संभावित anti-dote होता है जिससे  वह बीमार का इलाज करते हैं पर दिखाते ऐसा हैंं जैसे कि यह सब उनके पूजा- पाठ आदि के कारण हु...

69th day :: reality of dreams

ज़िन्दगी में हम सभी consciousness में रहते हुए एक लक्ष्य तय करते हैं और उसे पूरा करने का प्रयास करते है। यही 'लक्ष्य तक पहुँचने की इच्छा' को हम 'dream' (or  vision ) कहते हैं। जाने -अनजाने में यह 'इच्छा' (dream )  हमारे unconscious mind में भी स्टोर हो जाती है। इसलिए जब हम unconsciousness की दशा (or sleeping position) में होते है तो हमारा unconscious mind उस अधूरी इच्छा को पूरी करने के लिए एक पूरा animation या वीडियो बनाकर हमें हमारी इच्छा को पूरी होते हुए दिखाता है। dreams के बारे में एक और बात सच है कि ये तभी आते हैं जब दिमाग में स्थित hormones में disbalance होता है या हमारा unconscious mind जागता रहता है। एक स्वस्थ व्यक्ति जिसका सोने -जागने का समय निश्चित हो ,कोई तनाव न हो ,खाने -पीने की मात्रा निश्चित और उचित हो या hormonal disbalance न हो,  तो उसे सपने आने की probability भी बहुत कम होती है। इसका voice -versa भी उतना ही सही है। e.g.   हम रात को खा-पी कर समय पर सो गए और हमारे उठने का समय 7 am  है लेकिन रात में 3 am को हमें पेशाब लग जाए तो क्या होगा?चूँकि ...

66th Day :: Misuse of Confusion in Politics

Confusion has its own pros & cons. I had tell you before in my previous post that confusions are beneficial specifically in research because it helps to break set limits even when you don't have much will power to break it .  but its bad result is that it conjume much time and still results we get maybe wrong..because by the state of confusion we could  get the power to open an unknown gate but we didn't know that gate opens in the way will be of heaven or hell .so if we are in the state of confusion, we need somebody who knows the right way and can save us from opening the wrong door of hell & at whom we can fully trust .   but by our bad fate more people in the world are just opposite . such people who instead  of saving us from confusion, tries to get gain by throwing us in the situation of confusion. these are those opportunist 50/50 type people who behave you good as well as bad behavior so that you never can decide to oppose them . and by this gain t...

62th day :: Computer hi Computer hai, Solution kuch pata nahi

आज की दुनिया में कंप्यूटर का बहुत महत्त्व है।  कंप्यूटर ने हमारे बहुत से काम आसान कर दिए है।  वास्तव में कंप्यूटर ने भगवान् का रूप ले लिया है।  आपको जानकार आश्चर्य होगा क़ि अब ये सिर्फ कहने की ही बात नहीं रह गयी है यह सच है , आज परम कंप्यूटर ने परमात्मा की जगह ले ली है।  हमसे जो कहा जाता है कि परमात्मा सब देख , सुन और जान रहा है , वो असल में कोई व्यक्ति होता है जो परम कंप्यूटरों के माध्यम से हमारी जानकारियां चुरा रहा होता है। दुनिया भर में कुल 50 -100  सुपर कंप्यूटर, परम कंप्यूटर या क़्वांटम कंप्यूटर होंगे जो इन्ही तरह के कामो में लगे है। अगर इनका उपयोग समाज की भलाई के लिए और बुरे लोगों के खिलाफ  होता तो शायद इतनी दिक्कत की बात नहीं थी लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा है , बल्कि इसका ठीक उल्टा यानी कुछ पावरफुल लोगों द्वारा आम लोगों के खिलाफ और scientists की कीमती जानकारिया चुराने में  हो रहा है। आइये मैं आपको detail में बताता हूँ - 1.   Listener Computer :-  इस तरह के कंप्यूटर के द्वारा आपकी सभी बातें चाहे वो कितनी ही निजी क्यों न ह...

59th Day :: How to make our society clean from bad people

Our society is like a computer system & bad people are like the file infected with a virus. So we should use a solid antivirus system to make our computer(society) clean.Now think how an antivirus works:- it first repaires the files which are less corrupted and repairable & deletes the highly corrupted and unrepairable files. Now a question raises that how we can set the limit when a corrupted file(bad people) is repairable and when it needs deleting? this limit all depends on our capacity or +ve energy.for this take a look to the science theory of energy:- Positive and negative energy :- . Energy is like two pots filled with water. If we connect both the pots then energy will flow from higher to lower energy pot either it's +ve or -ve.  So We should be in the company of people with higher +ve energy & away from people with-ve energy. we can use our anti virus by using 3 keys-   i. e.  Ctrl, Alt then Delete key now learn the condition to use...

57th Day :: Psychology behind some ideologies

(1)   बड़ों के सामने और भगवान  के सामने सर झुकाना चाहिए। सच्चाई :- ऐसे वाक्य सीधे -साधे लोगों को कमजोर बनाकर उनसे गुलामी कराने के लिए कहे जाते हैं। बचपन में माँ - बाप के पैर छूने से शुरू हुआ यह सिलसिला आगे भगवान् ,फिर पंडित जी ,फिर गुरु , फिर डॉक्टर ,मंतरी ,विधायक ,पुलिस , जमींदार से होते हुए सड़क छाप दबंग तक पहुँच जाता है और सीधा -साधा आदमी जन्म से लेकर मौत तक सबके सामने नतमस्तक रहता है। और उसके झुके होने का फायदा उठाते हुए ये चालाक और बुरे लोग ज़िन्दगी भर उस भले आदमी की पीछे से मारते रहते हैं और वो सज्जनता के बोझ तले  दबा कभी विरोध भी नहीं कर पाता।   interesting बात ये है कि माता -पिता बच्चे का भला चाहते हुए भी ज़िन्दगी भर बच्चा ही बनाये रखना चाहते हैं।  वे उसे  कभी अपने पैरों पर खड़ा होने और दूसरों की गलत बातों का विरोध करना नहीं सिखाते। जहाँ तक भगवान् की बात है तो भगवान् को अच्छे लोगों को अपने क़दमों में झुकाने में अगर  ख़ुशी मिलती तो वो कभी आदमी को चार पैरो की जगह सर उठाकर दो पैरों पर चलने की काबिलियत ही नहीं देता।  हाँ बुरे लोगो ...

36th Day :: Networks

These days many criminal networks r active in our country like drug or intoxication, sex rackets & groups of mafias etc . D top members of these networks r very sharp minded. they work considering d human behaviour. Infact they know psychology and also they use psychiatric medicines to increase sexuality or tendency to take drug &    intoxications, so that person get forced to go to sex racket's place or to take drug, intoxications like heroin etc.  or they use it only for torchering .  torchering has some main targets- 1. Blackmailing for money. 2. As a warning to officers & other people for not coming in their way of crime. 3. To admit new gangasters & controlling them for their organisation. 4. To force new girls to enter in their sex racket. etc.  1st of all they search for appropriate person such as a rich one for intoxication,a good looking girl who need money & a bad  behaviourial man or criminal with a sharp mind to us...

35th Day:: Some examples of use of psychology & psychiatry by a mafia

1 . साइकोलॉजी के कुछ उदाहरण :-   मैंने पहले कहीं पढ़ा था कि मेंढक को अगर किसी पानी भरे बर्तन में डालकर बर्तन को गर्म किया जाय तो पानी के तेज गर्म होने पर भी वह बर्तन से बाहर नहीं भागता और मारा जाता है।  कुछ ऐसा ही लगता है जब मैं ये देखता हूँ कि दो-तीन दशक पहले तक फिल्मों में हीरोइन के भीगी साडी में होने पर भी बवाल मचाने वाले लोग आज भारतीय मॉडल्स के प्लेबॉय में न्यूड फोटो छपवाने के बावजूद चुप रहते हैं। दूसरा उदाहरण है कि बचपन में गुटखा भी न खाने वाला लड़का पहले मीठे पान से शुरुआत करता है और उसके बाद जर्दा पान फिर गुटखा,सिगरेट,बियर,शराब को ट्राई करते हुए एक दिन चरस,हेरोइन जैसे अधिक नशीले पदार्थों का आदी बन जाता है और अपने इन खर्चों को पूरा करने के लिए अपराध का अँधेरा रास्ता पकड़ लेता है। इस तरह एक माफिया को अपने गैंग के लिए नए gangastar मिल जाते हैं।  एक माफिया अपने गैंग में नए लोगों को भर्ती करने के उद्देश्य से मेलजोल बढाने के लिए और लोगों में अपना डर फैलाने के लिए  भी साइकोलॉजिकल tricks का सहारा लेता  है। इस मामले में किसी महत्वपूर्ण आदमी के अचानक किसी ...

34rth Day:: Mafiyavaad

आजादी के इतने वर्षों बाद जब मैं यह सोचता हूँ कि हमारा देश पर्याप्त विकास क्यों नही कर पाया तो जवाब यही आता है कि भले ही हम शारीरिक रूप से आजाद हो गए हों मगर अभी भी कई तरह की मानसिक गुलामी को हम ख़त्म नही कर पाए हैं।ऐसी ही एक मानसिक गुलामी का नाम 'माफियावाद' है। अंग्रेजों और माफियाओं के बीच फर्क सिर्फ इतना है कि अंग्रेज विदेशी थे और माफिया हमारे ही देश के, बाकी सब-कुछ same है । अंग्रेज भी बांटो और राज करो की नीति अपनाते थे और माफिया भी इसी नीति को अपनाते हैं।अंग्रेजों ने भी कुछ राजाओ के आपसी झगडे में एक का साथ देकर उन्हें अपने साथ मिला लिया और हमारे ही देश के ऐसे कुछ स्वार्थी राजाओं और व्यापारियों के दम पर वर्षों तक राज किया तो ये माफिया भी लोगों के बीच झगड़े करवाकर और फिर झगड़े में कुछ लोगों का साथ देकर उन्हें अपने काम के लिए तैयार करते हैं । यही लोग माफियाओं की ढाल बनते हैं। डर माफियाओं का मुख्य अस्त्र होता है और इस डर को कायम रखने के लिए ये माफिया कुछ भी करने को तैयार रहते हैं क्योंकि हम लोगों से ज्यादा डर इन लोगों के मन में होता है कि अगर जनता इनसे डरेगी नहीं तो इनके लिए 1 प...