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76th Day :: Bhoot Pret ka chakkar : Kitna Sach Kitna Ghanchakkar

भूत प्रेत के बारे में हम सभी ने सुना है। कुछ लोग मानते हैं तो कुछ नहीं मानते लेकिन आप सबने observe जरूर किया होगा कि गांव देहातों में भूत -प्रेत लोगों को अपने वश में कर लेते हैं और शहरों में लोग मानसिक बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं ।वास्तव में यह दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जहां एक तरफ general awareness के चलते शहरों में मानसिक बीमारियों का पहचान  करके इसका इलाज किया जाता है वही गांव में है उसे भूत में समझ कर उसका झाड़-फूंक किया जाता है। भूत- प्रेत का लेनदेन वास्तव में नशीली दवाओं का लेन-देन होता है जिसे victim दबाव डालने पर स्वीकार करता है( जहां  दबाव डालने के लिए ओझा तांत्रिक मिर्च वगैरह का धुआं या कोई अन्य डर आदि दिखाते हैं)। अक्सर लोग कहते हैं कि फलां आदमी ने उन्हें भूत दे दिया है तो इसका वास्तविक आशय होता है कि भला आदमी ने उसे नशीली दवा दे दिया है जिससे वह किसी मानसिक बीमारी के चपेट में आ गया है।  ओझा तांत्रिकों के पास इस बीमारी का संभावित anti-dote होता है जिससे  वह बीमार का इलाज करते हैं पर दिखाते ऐसा हैंं जैसे कि यह सब उनके पूजा- पाठ आदि के कारण हु...

70th day :: A new mobile technology

आज हम एक ऐसे दौर में हैं जहां रोज एक नयी टेक्नोलॉजी की खोज हो रही है।  मैं फिलहाल मोबाइल टेक्नोलॉजी के बारे में बात करना चाहता हूँ। बदलते समय के साथ मोबाइल की सिम छोटी होती जा रही है, फिलहाल नैनो सिम का ज़माना है। साथ ही बिना  चिप वाले मोबाइल का चलन हो रहा है। लेकिन मैं नो सिम & नो चिप और unibody मोबाइल  टेक्नोलॉजी की बात करना चाहता हूँ। शायद कुछ ही लोगों को primo जैसी apps के बारे में पता होगा जो कुछ charge लेकर मोबाइल  नंबर उपलब्ध कराती हैं। लेकिन अभी मोबाइल में primary सिम का होना जरूरी है जबकि मैं मोबाइल में inbuilt number की बात करना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि कम्पनियाँ लोगों को रिलायंस के CDMA SET की तरह inbuilt number प्रोवाइड कराएं और मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी को इतना आसान बनाएं कि customer को मनचाहा नंबर और network चुनने की पूरी आजादी मिले। यहां तक कि पोर्टेबिलिटी सिर्फ फिंगरप्रिंट वेरिफिकेशन (आधार कार्ड से जोड़ कर ) द्वारा हो जाए। 

62th day :: Computer hi Computer hai, Solution kuch pata nahi

आज की दुनिया में कंप्यूटर का बहुत महत्त्व है।  कंप्यूटर ने हमारे बहुत से काम आसान कर दिए है।  वास्तव में कंप्यूटर ने भगवान् का रूप ले लिया है।  आपको जानकार आश्चर्य होगा क़ि अब ये सिर्फ कहने की ही बात नहीं रह गयी है यह सच है , आज परम कंप्यूटर ने परमात्मा की जगह ले ली है।  हमसे जो कहा जाता है कि परमात्मा सब देख , सुन और जान रहा है , वो असल में कोई व्यक्ति होता है जो परम कंप्यूटरों के माध्यम से हमारी जानकारियां चुरा रहा होता है। दुनिया भर में कुल 50 -100  सुपर कंप्यूटर, परम कंप्यूटर या क़्वांटम कंप्यूटर होंगे जो इन्ही तरह के कामो में लगे है। अगर इनका उपयोग समाज की भलाई के लिए और बुरे लोगों के खिलाफ  होता तो शायद इतनी दिक्कत की बात नहीं थी लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा है , बल्कि इसका ठीक उल्टा यानी कुछ पावरफुल लोगों द्वारा आम लोगों के खिलाफ और scientists की कीमती जानकारिया चुराने में  हो रहा है। आइये मैं आपको detail में बताता हूँ - 1.   Listener Computer :-  इस तरह के कंप्यूटर के द्वारा आपकी सभी बातें चाहे वो कितनी ही निजी क्यों न ह...

44th Day :: Space is not in vaccume

Some days ago when I was boiling water, I saw that many small particles were started to move in a circle. there some more particles who are smaller than those particles are moving around the big particles. this whole system is looking same as our solar system. Thus I have 'guessed' some properties of our solar system which r as bellow:- 1.  Our solar system is in a liquid medium made of a transparent but very tiny particles who has not discovered till now. 2.  if space is in a vaccume then by applying Newton's theory there should never need energy to travel because of absence of friction. so any rocket should travel with the velocity when it leaves the gravity field of earth & need no energy source until it gets in touch of gravity field of any planet. 3.  not big but a reason to think so is that in space things follow the rule of a liquid, I mean they  float in space. 4.  again if we apply Newton's law in space then things who are moving will keep...