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49th Day ::- The Destiny : We should believe or not

कई बार (usually in films) जब किसी को ये कहते हुए सुनता था कि "we are here because it's our destiny", तो मैं ये सोचता था कि ये destiny क्या होती है।  अब काफी समय बाद जैसे थोड़ा-बहुत जान पाया हु थोड़ा-थोड़ा इसपर यकीन भी करने लगा हूँ। इसे prove करते हुए कुछ example मुझे दिखाई देते हैं। जैसे- लोहे की destiny है कि उसे कभी न कभी आग में गलाकर उससे औजार या हथियार बनाया जाएगा। इसलिए ये भी उसकी destiny है कि कभी-न-कभी वो लोहार या मैकेनिक के पास भी जरूर पहुँचेगा।  इसी तरह सोने की destiny है कि उसे आग में गलाया जायेगा , एसिड से जलाया जाएगा और साथ ही वो किसी औरत के श्रृंगार के लिए use  होगा। ऐसे ही  हीरे की destiny है कि उसे कई बार cut किया जाएगा और पोलिश किया जाएगा।                हमारी भी destiny कुछ-कुछ ऐसी ही है।  हमें भी अपने गुणों के अनुसार संसार में किसी विशेष जगह जाना पड़ता है और किसी विशेष type के व्यक्ति से मिलना पड़ता है।  बस हममें और निर्जीव वस्तुओं में एक फर्क ये है कि निर्जीव वस्तुएँ चुनाव नहीं करतीं लेकिन हम चुन...

48th day :: Corruption : it's just not because they take,it's because we give

हम सभी corruption से परेशान हैं।  शायद ही कोई दिन ऐसा जाता है जब हम इसके लिए system को न कोसते हों। लेकिन क्या कभी हम सोचते हैं कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है ? जवाब है कि इसके लिए कहीं न कहीं हम सभी जिम्मेदार हैं। हम सभी राशन (या गैस आदि ) के लाइन में लगे होते हैं तो हम सभी चाहते हैं कि पैसे देकर , पहचान दिखाकर या दबंगई करके राशन हमें पहले मिल जाए। इधर हमने लाइन तोड़कर राशन लिया और उधर corruption को पैदा कर दिया। लेकिन हमें दिक्कत तब होती है जब कोई और (जो हमारी नक़ल करके ही corruption सीखता है) लाइन तोड़कर हमसे पहले राशन ले लेता है।             एक और अच्छा उदाहरण देता हुँ ::- हममें से अधिकतर लोग अपने गन्तव्य तक जल्दी पहुंचने के लिए ट्रैफिक सिग्नल तोड़ देते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम लग जाता है। ज्यादा से ज्यादा हम ट्रैफिक पुलिस को रिश्वत देकर बच जाते हैं, लेकिन हमें दिक्कत तब होती है जब हमारी ही नक़ल करके कोई और ट्रैफिक सिग्नल तोड़ कर जाम लगा देता है और उसकी वजह से हमें घंटों देर हो जाती है ।     यही ट्रैफिक जाम हमारे system का corruption है। ...

47th Day :: Sab Bikta Hai

ये कुछ लाइन मैंने बाजारवाद को स्पष्ट करने के लिए लिखी हैं। उम्मीद है आपको पसंद आएँगी। कभी खामोश आँखें तो कभी किसी का लब बिकता है, ये दुनिया का बाज़ार है यहाँ सब बिकता है।  सिर्फ खास time पर नहीं जब चाहो तब बिकता है, केवल धरती ही नहीं 'नभ' बिकता है।  कभी दयावान समाजसेवी तो कभी कोई क्रिमिनल 'बेरहम' बिकता है, कभी डरे हुए लोग तो कभी जिगर का 'दम' बिकता है। कभी शान्ति-समझौता तो कभी गोली-बम बिकता है, कभी दंगे से पैदा डर तो कभी तकलीफों के घाव पर सहानुभूति का 'मरहम' बिकता है । क्योंकि ये दुनिया का बाज़ार है , यहाँ  सब बिकता  है।  कभी Dirty Picture का ब्लाउज तो कभी britney का चबाया हुआ 'chewingum' बिकता है, कभी किसी सेलेब्रिटी के चेहरे की बनावटी मुस्कान तो कभी असली आँखें 'नम' बिकता है। कभी 3 साल से पड़ा सूखा तो कभी बारिश झमाझम बिकता है, कभी उजाला तो कभी घनघोर 'तम' बिकता है। क्योंकि ये  दुनिया का बाज़ार है यहाँ सब बिकता है। कहीं कोई धन्नासेठ छप्पन भोग खाते और पीते हुए 'रम' बिकता है , तो कहीं ...

46th Day :: Colour Mystery

फिल्मों का कलर 'ब्लू'  होते ही वो गन्दी क्यों हो जाती है (blue film), area का कलर 'रेड' होते ही वो बदनाम क्यों हो जाती है (red light area), अवैध तरीके से इकठ्ठा किया गया पैसे का कलर 'black' क्यों होता है(black money),suger का कलर 'brown' होते ही ये नशीली क्यों हो जाती है(brown suger) , फिल्मों में विलेन का रोल हमेशा 'grey shed' में क्यों होता है और इन सब काले कारनामों को हरी झण्डी दिखाने वाले नेता 'सफेदपोश' क्यों कहलाते हैं। नीली और लाल बत्ती ऐसे ही सफेदपोशों को ही क्यों मिलता है और अंत में नीली और लाल बत्ती ही सबसे ताकतवर क्यों है ??? मुझे तो केवल 'पानी दा रंग' पसंद है , बिल्कुल transeparent !  जिस बर्तन में जाता है उसी का आकार ले लेता है, उसी के रंग का  दिखने भी लगता है लेकिन लोगों की प्यास बुझाने और जीवन देने के अपने गुण को नहीं छोड़ता।  

45th Day :: filmy style of wild Underworld

दुनिया में सिर्फ साइंस में ही तरक्की नहीं हो रही है , और चीजों में भी तरक्की हो रही है। चीजें hitech होने के साथ स्टाइलिश भी हो रही हैं। अब अंडरवर्ल्ड को ही ले लीजिये , अब ये पुराने जानवरों(शेर,भालू,भेड़िया, साँप, चूहा , बिल्ली , खरगोश आदि स्टाइल )  वाले तरीके नहीं अपनाता जैसे कि काम कराने के लिए डराना-धमकाना और कामं न होने पर  मार देना। अब अंडरवर्ल्ड किसी को  धमकाने या मारने का काम भी style से करता है जैसे किसी को सजा देने के लिए कोई 'जिन्दा ' style में सालों तक कैद करके रखता  , कोई देवदास style में दो लड़कियों के बीच में फँसाकर किसी का दिल बर्बाद करता है तो कोई 'डर' स्टाइल में किसी के दिल में उसके lover का वहम पैदा करके उसे एक जगह  से दूसरे जगह दौडाता है या किसी और फिल्म के विलेन  का ट्रिक लेकर डर पैदा करने की कोशिश करता है ।  कोई भेजा-फ्राई करने में आगे है तो कोई पर्सनल बातों के आधार पर COMMENT करके अपने शिकार को परेशान करता है।   इसी तरह के कई तरीके हैं।  

44th Day :: Space is not in vaccume

Some days ago when I was boiling water, I saw that many small particles were started to move in a circle. there some more particles who are smaller than those particles are moving around the big particles. this whole system is looking same as our solar system. Thus I have 'guessed' some properties of our solar system which r as bellow:- 1.  Our solar system is in a liquid medium made of a transparent but very tiny particles who has not discovered till now. 2.  if space is in a vaccume then by applying Newton's theory there should never need energy to travel because of absence of friction. so any rocket should travel with the velocity when it leaves the gravity field of earth & need no energy source until it gets in touch of gravity field of any planet. 3.  not big but a reason to think so is that in space things follow the rule of a liquid, I mean they  float in space. 4.  again if we apply Newton's law in space then things who are moving will keep...

43rd Day :: Media & Multimedia

कभी आजादी दिलाने के लिए लोगों को जगाने और क्रांति करने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला media महज चन्द  पावरफुल लोगों के हाथों की कठपुतली सा बनता जा रहा है। अब मीडिया का काम केवल विभिन्न कंपनियों और celebrities या राजनेताओं का प्रचार करना भर रह गया है। जनता की आवाज़ उठाने की इन्हें अब फुर्सत ही नहीं रह गयी है। दुर्भाग्य से अब तो झूठ भी सीना तानकर परोसा जाने लगा है जबकि जरूरत न सिर्फ सच बल्कि सही को दिखाने की है। इनका ध्यान अधिकतर केवल स्टिंग ऑपरेशन पर ही लगा रहता है क्योंकि इससे सनसनी फैलती है। जो कि अधिकतर political दबाव बनाने की रणनीति का ही हिस्सा होता है। बड़े रिश्वतखोर नेताओं और आपराधिक रिकार्ड वाले व्यक्तियों का स्टिंग ऑपरेशन तो समझ में आता है लेकिन सही छवि वाले लोगों की निजी जिंदगी में झाँकने की इजाजत इन्हें कौन दे देता है। इनका तर्क होता है कि सार्वजनिक लाइफ जीने वाले लोगों के बारे में सबकुछ जानना जनता का हक है। ठीक है कि सार्वजनिक क्षेत्र में काम करने वाले actors , actresses या कोई अन्य व्यक्ति प्रचार के लिए अपनी कुछ निजी जानकारियाँ ...